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पत्रकारिता का काला अध्याय – Patrakarita Ka Kaala Adhyay

पत्रकारिता का काला अध्याय – Patrakarita Ka Kaala Adhyay

यह किताब सन 2001 के दौर में चैबीस घंटे के चैनलों की शुरुआत के बाद भारतीय पत्रकारिता के बदलते स्वरुप को समझने का एक प्रयास है। लोकतंत्र में चैथे स्तंभ की जिम्मेदारी क्या रही है और एजेंडा के तहत पत्रकारिता के जुनुन में क्या जिम्मेदारी निभाई गई है, यह किताब उसी पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट है। सोशल मीडिया के दौर में मेनस्ट्रीम मीडिया कहां है और उसके लिए चुनौती क्या है घ् इन चुनौतियों के सामने उसने संघर्ष किया या समर्पण, इस पर चर्चा जरुरी है। पत्रकारिता के छात्र के लिए भी यह समझना जरुरी है कि पत्रकारिता के इतिहास को जानकर उसके वर्तमान हालात से आंख नहीं मूंदा जा सकता है।

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