Tuesday, July 27Persecution of Sanatani/Hindus is Our Persecution.

हिंदू दमन, भारत का दमन है, हम सबका दमन है

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1857-ka-swatantraya-samar

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Vinayak Damodar Savarkar वीर सावरकर रचित ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ विश्‍व की पहली इतिहास पुस्तक है, जिसे प्रकाशन के पूर्व ही प्रतिबंधित होने का गौरव प्राप्‍त हुआ। इस पुस्तक को ही यह गौरव प्राप्‍त है कि सन् 1909 में इसके प्रथम गुप्‍त संस्करण के प्रकाशन से 1947 में इसके प्रथम खुले प्रकाशन तक के अड़तीस वर्ष लंबे कालखंड में इसके कितने ही गुप्‍त संस्करण अनेक भाषाओं में छपकर देश-विदेश में वितरित होते रहे। इस पुस्तक को छिपाकर भारत में लाना एक साहसपूर्ण क्रांति-कर्म बन गया। यह देशभक्‍त क्रांतिकारियों की ‘गीता’ बन गई। इसकी अलभ्य प्रति को कहीं से खोज पाना सौभाग्य माना जाता था। इसकी एक-एक प्रति गुप्‍त रूप से एक हाथ से दूसरे हाथ होती हुई अनेक अंत:करणों में क्रांति की ज्वाला सुलगा जाती थी।पुस्तक के लेखन से पूर्व सावरकर के मन में अनेक प्रश्‍न थे—सन् 1857 का यथार्थ क्या है? क्या वह मात्र एक आकस्मिक स...