Thursday, September 23Persecution of Sanatani/Hindus is Our Persecution.

हिंदू दमन, भारत का दमन है, हम सबका दमन है

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“कम्यूनल” की गलत परिभाषा से नष्ट हो रहा है, सनातन और हिन्दू

“कम्यूनल” की गलत परिभाषा से नष्ट हो रहा है, सनातन और हिन्दू

आइए अपनी संस्कृति कि पुनर्स्थापना करें और इस यज्ञ में सेक्युलरिज्म के ढोंग को जला कर स्वाहा करें ”  

 डिक्शनरी में कम्यूनल का अर्थ है सामूहिक, समुदाय, सामुदायिक, पंचायती, समुदायिक किचन, इसी से निकला है साँझ चूल्हा

अनेक तरह के लोगों या समूहों के साथ एक समुदाय मे रहना, ऐसा समुदाय जिसकी सामूहिक विरासत हो, अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, जीवन मूल्यों का सामूहिक रूप से स्वीकृति हो, लेकिन सबका स्रोत एक हो और निर्विवाद हो ।  

लेकिन भारतीय राजनीति भाषा और शब्दावलि मे “कम्यूनल” शब्द का अर्थ या परिभाषा, स्वतंत्र नहीं है बल्कि, सेक्युलरिज़म कि गलत प्रचलित परिभाषा से जुड़ा हुआ है  

यानि जो परिभाषा या अर्थ सेकुलरिज़्म का है, ठीक उसके उलट, और विपरीत अर्थ या परिभाषा कम्यूनल शब्द का है, होगा और होना चाहिए । 

सरल शब्दों में कहें तो सेक्युलरिज्म कि जो नकली परिभाषा, नक्सलियों ने भारत मे बनाया है

उसि को आधार बना कर सीधे उसके परिणाम के रूप मे कम्यूनल कि परिभाषा को बनाया गया

जो शब्दकोश के अर्थ से कहीं दूर दूर तक मेल नहीं खाता है

भारत मे कम्यूनल होने के लिए आप को केवल यह कहना है आप हिंदू हैं, और  आपकी एक विशाल साझी संस्कृतिक विरासत है, ज्ञान परंपरा है

इतना ही काफी है आपके कम्यूनल होने के लिए,

सारे सेक्यूलर आपका जान लेने के लिए आपके खून के प्यासे हो जाएंगें,

वस्तुतः भारतीय राजनीतिक भाषा व शब्दावली मे “हिन्दू” शब्द एक अछूत शब्द है, एक गाली है, एक गंदा शब्द है

सेक्युलरिज्म के इस गलत परिभाषा से भयाक्रांत हिन्दू कभी साहस ही नहीं कर पाता है कि वो अपने आप को हिन्दू कह सके

हिन्दू नेता भय के मारे इस बात को भी नहीं कह सकता कि भारत एक महान सनातन सभ्यता है, भारत कि एक अपनी महान ज्ञान परंपरा है, यह सबसे प्राचीन और एकमात्र जीवित और निरंतरता को बनाए रखने वाली सभ्यता है ।

आज का आधुनिक युग भारत के महान ज्ञान परंपरा का ऋणी है । सनातन सिद्धांत में धर्म ही विज्ञान है और विज्ञान ही धर्म है ।

यह सनातन है जो मानव कल्याण कि कामना करता है ।

कोई भी मजहब केवल एक समुदय के कल्याण कि कामना करता है ।

जैसे इस्लाम केवल मुसलमान के लिए और क्रिश्चियन केवल इशाइयों के लिए कल्याणकारी है

इसे स्वीकार करने वाला कोइ भी राजनेता या साधारण व्यक्ति भी सदा नक्सल और जिहादियों के हमले का  शिकार होता है

तुरंत उसकि भर्त्सना कि जाती है, उसे मूर्ख बताया जाएगा , हिन्दू शोभिनिष्ट कहा जाता है

उसे समाज को तोड़ने वाला, अशान्ति फैलाने वाला, राष्ट्रीय एकता का दुश्मन कहा जाता है ।

वह व्यक्ति एक हिन्दू फन्डमेनलिस्ट, फासिस्ट, नाजी कहालाता है और अंत मे उसे आर एस एस से जोड़ कर मुसलमनो का कातिल ठहराया जाता है

भारत मे जिस तरह से संविधान ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाया है उसी तरह भारतीय न्यायपालिका भी हिंदुओं के खिलाफ काम करती है

आपने अभी अभी देखा कैसे सुप्रीम कोर्ट ने इसी सेकुलरिज्म के गलत परिभाषा के दबाब मे आकर बकरीद मनाने की इजाजत तो देता है

लेकिन कवँड़ यात्रा कि इजाजत नहीं देता है यह केवल एक उदाहरण नहीं बल्कि पूरा पैटर्न है

अब आप ही तय करें

सेक्युलरिज्म और कम्यूनलिज़्म के इन गलत अर्थों के साथ चलने वाला भारतीय राजनीति, क्या कभी भारतीय सनातनी हिंदुओं की रक्षा कर पाएगा ?

और यही वजह है कि आप पूरे भारतवर्ष से केवल हिंदुओं के दमन का समचार सुनते रहते है

और एसा महसूस होता है, हिन्दू भारत मे अनाथ असहाय केवल अपनी मौत कि प्रतीक्षा कर रहा है

नक्सल और जिहाद कि प्रताड़ना हर हिन्दू के हिस्से में है, केवल देखना यह है कि किसका नंबर पहले आता है ?  

यदि इसे बदलना है तो हमे सरकार, राजनीतिक पार्टी, न्यायालय, पुलिस, कानून इन सबके भरोसे को छोड़ना होगा

और एक समाज के रूप में हमे अपने आध्यातम, संस्कृति, संस्कार, भाषा, विशेष रूप से संस्कृत कि ओर लौटना होगा, उसे अपने प्रयासों से स्थापित करना होगा

इस यज्ञ मे कई लोग लगे हुए है हम सबको खुल कर, गर्वित होकर उनके साथ मजबूती से खड़ा होना होगा

हमे स्वामी यति नर्सिहांनन्द सरस्वती जैसे साहसी और ज्ञानी संत के साथ पूरी ताकत से खडा होना चाहिए, उन्हे मजबूत करना होगा

आइए अपनी संस्कृति कि पुनर्स्थापना करें और इस यज्ञ में सेक्युलरिज्म के ढोंग को 

जला कर स्वाहा करें     

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