Monday, November 29Persecution of Sanatani/Hindus is Our Persecution.

हिंदू दमन, भारत का दमन है, हम सबका दमन है

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सेक्युलरिज़्म की गलत परिभाषा से नष्ट हो रहा है भारत

सेक्युलरिज़्म की गलत परिभाषा से नष्ट हो रहा है भारत

भाग -1 | कैसे भारत को बर्बाद कर रहा है ? सेक्युलरिज़्म और कॉमयूनलिज्म कि गलत परिभाषा || भारत बचाओ

सेक्युलरिज़्म के चारों ओर भारतीय राजनीति का भाषा शिल्प ओर शब्दवाली घूमता है, लेकिन समस्या यह है कि भारत मे सेक्यलरिज़्म कि परिभाषा गलत तरीके से इस्तेमाल हो रहा है

जिसकी वजह से दशकों से भारत का बहु संख्यक हिन्दू समाज आत्मग्लानि,  अपराधबोध और राजनीतिक रूप से हाशिये पर जी रहा है और एक खतरनाक  भ्रम का शिकार बना हुआ है

ये दो ऐसे शब्द हैं जिनका समाज मे आम बोल चाल कि भाषा से लेकर राजनीतिक भाषा के शब्दावली में प्रचूरता से प्रयोग होता  है

या यूं कहें कि आज के भारतीय समाज में किसी भी तरह के वैचारिक धरातल पर जब हम सामाजिक और राजनैतिक विचार विमर्श करते है, तब हम स्पष्ट तौर पर यह अनुभव कर सकते है हमारे विचारों का अदान  प्रदान कहीं न कहीं इन दो शब्दों के चारों ओर घूमता रहता है

इन शब्दों का प्रयोग ट्रेन कि यात्रा,  चाय के दुकान, घर मकान परिवार से लेकर स्कूल, कॉलेज, साहित्य सिनेमा, नाटक, बड़े बड़े लेखक, पत्रकार, टीवी स्टूडियो, सेमीनार, कोन्फ़्रेंस, मे भी आसानी से मिलता है

संविधान, नियम, कानून कायदे, तमाम सरकारी योजनाए, नितीयां जो आपके जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करता है, वहाँ भी ये दोनों शब्द महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं।

लेकिन इन शब्दों कि अपनी एक त्रासदी है और यह अपने आप मे एक बड़ी विचित्र  और भायावह समस्या भी है

सेक्यलरिज़्म कि अवधारणा भारत में यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका से लाया गया है वहाँ इस अवधारणा का जन्म समाज को चर्च के शोषण से मुक्ति के लिए लाया गया था

जबकि भारतीय समाज में जैवीय और दैवीय विविधता नितांत स्वाभाविक रूप से प्रचलित रहा है और आज भी है, भारतीय ज्ञान परंपरा का यह विचार पश्चिम के “सेक्युलरिज़्म” के विचार से बहुत ही उदात्त और उच्च श्रेणी का है साथ ही साथ नैसर्गिक भी है

इसलिए, अंग्रेजी भाषा से लिए गए “सेक्यलरिज़्म” शब्द का, भारतीय राजनीतिक शब्दावली/भाषा मे बिल्कुल ही उल्टा अर्थ है ।

इन शब्दों का मूल अर्थ जो शब्दकोश मे दिया गया है या जो यूरोप मे था, वह उनसे भारत में बिल्कुल भी मेल नहीं खाता है  

यह अपने आप मे एक बड़ी समस्या है और भारतीय समाज के लिए एक विसंगति पैदा करता है ।

खास कर भारत के बहुसंख्यक सनातनि हिंदुओं के लिए एक बड़ा राजनैतिक खतरा है ।  और धीरे धीरे हिंदुओं के विलुप्त होने कि ओर ले जा रहा है.

सेकुलरिज्म शब्द का अर्थ अंग्रेजी शब्दकोश में

“The belief that religion should not influence or be involved in the organization of society, education, government, state, moral, etc.”

“इसका मतलब है कि- सरकार, शिक्षा, समाज, नैतिकता आदि के संचालन, संरचना, प्रयोजन, और गठन पर मजहब /धर्म का कोई प्रभाव नहीं हो ।

यानि दूसरे शब्दों मे कहें तो , सरकार, शिक्षा, समाज, नैतिकता, सामाजिक नैतिकता, राजनैतिक नैतिकता ये सब के सब धर्म या मजबह से मुक्त होंगे”

लेकिन भारत में,  ठीक  इसके उलट, सेक्यलरिज़म शब्द का अर्थ है

“भारतीय / सनातन सभ्यता – संस्कृति, हिंदुओं का और उनसे जुड़े हुए सामाजिक , संस्कृतक, पारिवारिक,आध्यात्मिक मूल्यों  दमन ,त्याग और तिरस्कार

हिंदुओं से जुड़े हुए कोई भी  एतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक, वैज्ञानिक सिद्धांतों मान्यताओं और विचारों को  त्यागने के योग्य व घृणास्पद बनाना या बताना, उससे दूरी बनना, उसे नजरअंदाज करना, उसे गाली देना और अपने से दूर रखना आदि आदि ।

सेक्यलरिज़म कि परिभाषा मे आता है, कम शब्दों मे कहें तो भारत मे प्रचलित

सेक्यलरिज़्म शब्द का अर्थ “हिन्दू घृणा और हिन्दू दमन है”

यंहा तक कि सेक्यलरिज़म शब्द के इसी गलत अर्थ के प्रकाश में, संविधान कि धारा 25 से 30 के प्रावधानों को हिंदुओं के खिलाफ बना दिया गया और इसके वजह से आज भारत मे हिन्दू दोयम दर्जे का नागरिक बना हुआ है ।

साथ ही साथ भेड़-बकरी कि तरह हिंदुओं का तेज गति से कन्वरजन इस्लाम और इसाई में किया जा रहा है

संविधान कि ये धराएं  निश्चित करती है कि सनातन / हिन्दू सभ्यता संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, हिन्दू धर्म का पठन पाठन, सनातन धर्म ग्रंथों को भारत के  शिक्षा व्यवस्था से काट दिया जाए ।

जबकि दूसरे तरफ इस्लाम और इसाई  दोनों को अपने मजहब कि पुस्तकें बाइबिल व कुरान कि शिक्षा वो अपने स्कूल मे दे सकते है ओर भारत में अपने मजहब का प्रचार प्रसार कर सकते है

इसके लिए  भारत सरकार योजनाए बनती हैं और मदद भी देती है ।

संविधान के इन्ही धाराओं के प्रकाश मे मदरसे और कान्वेन्ट स्कूल को सरकारी सहायता दि जाती है

और इन मदरसों व कान्वेन्ट स्कूलो मे दो चीजें  प्रमुखता से पढ़ाई जाती है

  1. हिन्दू से नफरत, उसे नीचा दिखाने कि लगातार कोशिश
  2. हिंदुओं को कन्वर्ट कर मुसलमान या क्रिश्चियन बनाना

इसी तरह संस्कृत भाषा को भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था से व्यवहरिक तौर पर पूरी तरह से निकाल दिया गया ।

यह सब आजादी के बाद नेहरू जैसे तथाकथित हिन्दू नेताओं के संरक्षण मे किया गया ।

और उसके बाद के सभी हिन्दू नेताओं ने इस कार्य को आगे बढ़ाया

आज हिन्दू नेताओं को भारत मे सेक्यलर दिखने के लिए अनेक समाज विरोधी हिन्दू विरोधी, काम करना पड़ता है, जैसे कि :  

  • इस्लामिक विचारधाराओं को समर्थन देना,
  • उसे अपनाना, खुद को उसके समीप बताना,
  • इस्लाम का संरक्षक बताना,
  • उसे अपने नीतियों / विचारों का आधार बनना,
  • मुसलमानों का इस्लाम के आधार पर खुला समर्थन करना,
  • मुसलमान के आगे राजनीतिक समर्पण करना आदि

आज्ञनता, कायरता और लालच के वश में आकार, ये सारे हिन्दू विरोधी कार्य,  हिन्दू नेताओं द्वारा किया जाता है, केवल सत्ता पाने के उद्देश्य से

भारत के महान राजनीतिक विशेषज्ञ श्री सीता राम गोयल जी अपने पुस्तक “पर्वर्शन ऑफ इंडिया पोलिटिकल पार्लन्स” में स्पष्ट रूप से बताते है ।

और हम इसे सामाजिक धरातल पर भी, अपने जीवन मे प्रत्यक्ष पाते हैं  

“भारत का राजनेता, लेखक, पत्रकार, कवि, कलाकार, निर्देशक, ऐक्टर, ऐक्ट्रिस राजनीतिक पार्टी चाहे कोई भी हो , भारत मे हर किसी को, जो स्वयं को सेक्युलर बताना या दिखाना चाहता है, उसे इन 5 बातों मे विश्वास करना होगा”

ओर आप देख सकते है, आज भी एसा ही हो रहा है  

वो पाँच बातें हैं

  1. मूसलमान भारत मे आजादी के बाद गरीब हो गया है और अत्याचार का शिकार एक माईनॉरटी कम्यूनिटी है
  2. भारत का मूसलमान, भारत के विकास यात्रा के स्वाभाविक लाभ से बंचित है  
  3. मूसलमान के मजहब और संस्कृति को पर्याप्त, तर्कसंगत, कानून संगत रूप से  समाज में, सार्वजनिक जीवन और मीडिया मे जगह नहीं मिलता है
  4. मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में  पब्लिक या प्राइवेट नौकरी नहीं दी जा रही है 
  5. सुरक्षा एजेन्सीज मे हिंदुओं कि बहुलता मुसलमानों के लिए बड़ा खतरा है

यदि इन पांचों बिंदुओं को आप मानते है तो आपको सेक्युलर कहा जाएगा अन्यथा आप सेक्युलर नहीं हैं

अब आइए इन बिंदुओं पर एक-एक कर विचार करें, और देखें, जमीन पर क्या स्थिति है  

पहला बिन्दु लेते है

  1. मूसलमान भारत मे आजादी के बाद गरीब हो गया है और अत्याचार का शिकार एक माईनॉरटी कम्यूनिटी है

इस बिन्दु मे दो हिस्सा है एक हिस्सा है, अत्याचार का शिकार एक मनॉरटी कम्यूनिटी है

मूसलमान वहि कम्यूनिटी है जिसने भारत के तीन टुकड़े किये 1947 के बाद पहले पाकिस्तान फिर बांग्लादेश, और फिर  कश्मीर को पूर्ण रूप से इस्लामिक राज्य बनाया

भारत के टूटने के क्रम मे लाखों हिंदुओं कि हत्या, इसी समुदाय ने किया, 1990 के दशक में 6 लाख कश्मीरी हिंदुओं को पीट पीट कर कश्मीर से इन्ही माईनॉरटी कम्यूनिटी मुसलमान ने निकाल दिया और आज देश के कोने कोने मे मुसलमान जिहाद के जरिए हिंदुओं का पलायन करा कर हिंदुओं के जमीन पर कब्जा कर रहा है .

गरीबी को देखें तो आज किसी भी मुस्लिम बहुल इलाके मे आप जाएं तो वहां वही समृद्धि मिलेगी जो किसी और हिन्दू इलाके में है

आज भी भारत मे कई व्यवसाय ऐसे है जिन पर मुसलमानों कि काफी पकड़ है, और कई ऐसे व्यवसाय है जो पारंपरिक तौर पर हिन्दू के पास था लेकिन आज मुसलमानों ने उसे छीन लिया है उदाहरण के लिए हेयर कटिंग या सैलून का व्यवसाय, फल और सब्जी का व्यवसाय इत्यादि

तो जमीन पर मुसलमान न तो माइनरिटी है, न कमजोर है, और न ही गरीब है

उलटे देश के विभिन्न हिस्सों मे जहाँ जहां मुसलमानों कि बड़ी संख्या है, वहां से हिन्दूओ का लगातार पलायन हो रहा है

ताजा उदाहरण , कश्मीर के बाद बंगाल में हो रहे हिन्दू दमन को आप देख सकते है,  रेप, हत्या, आगजनी, और लाखों हिंदुओं का बंगाल से आसाम भाग जाना, इस बात को दिखाता है कि मुसलान न  तो गरीब है न कमजोर है और न ही माईनॉरटी है

वो तो बस सेकुलरिजम के गलत व्याख्या का फायदा उठाते हुए दारुल इस्लाम बना रहा है और लगातार भारत मे हिंदुओं के रहने कि जगह को छोटा करता जा रहा है

सेक्यलरिज़म के इस गलत अर्थ के वजह  से देश के अंदर कितना भयंकर  हिन्दू विरोधी परिणाम  हुआ है, आइए उसे देखते है

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का प्रसिद्ध कथन है “देश के संसाधन पर मुसालमनो का पहला हक है”

ऐसी बात कह कर मनमोहन सिंह स्वयम को एक महान सेक्यलर सिद्ध करना चाहते हैं ।

लेकिन इसके साथ ही समाज में हिंदुओं के दमन का एक नया रास्ता खोलते है .   

केजरिवाल जो कि अभी दिल्ली क मुख्यमंत्री है, आप जानते हैं कैसे एक रेपिस्ट को सिलाई मशीन दिया था, अभी कोरोना काल में एक डॉक्टर कि मौत पर उसने एक करोड़ कि मदद दि क्योंकि वे मुसलमान थे, दिल्ली के मस्जिदों मे मौलवी को भी सरकार सैलरी देती है

वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा “एक हाथ मे कुरान ओर दूसरे हाथ मे कंप्युटर”

आपने यह भी देखा होगा यदि मोदी जी भाषण कर रहे है और अज़ान कि आवाज सुनाई दे जाए तो  वो अपना भाषण रोक देते हैं

अभी अभी मीडिया मे आया है, सेना मे भी मुस्लिम धर्म गुरुओं कि नियुक्ति होगी और ये नियुक्ति देवबंद से होगी

याद रहे उत्तरप्रदेश मे देबबंद मुसलमानों का वो संस्थान है जहां कि किताबों से तालिबान अपनी शिक्षा ग्रहण करते है और पूरे विश्व में आतंक फैलाते हैं ।

ये घटनाएं और वक्तव्य यह दिखाता है कि भारतीय हिन्दू राजनेता कितनी तत्परता से स्वयम को सेक्युलर दिखाना चाहते है और वो भी एक गलत परिभाषा के संदर्भ में

और सेक्युलर दिखने के लिए हिंदुओं का बलि हिंदुओं से पूछे वगैर चढ़ा देते है

यह एक अज्ञानता और कायरता से भरा हुआ कृत्य है जिसे हम गांधी सिंड्रोम कह सकते है

क्योंकि ये घातक बीमारी हिन्दू समाज को 100 साल पहले गांधी सिंड्रोम के वजह से और मजबूती पकड़ लिया है और अभी भी लगा हुआ है ।

ध्यान देने कि बात है अनेक सरकारी योजनाए जो केवल मुसलमानों के लिए है, याद रहे इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आपको गरीब नहीं, मुसलमान होने कि जरूरत है , और इसका सीधा असर देश के सामाजिक मजबूती पर पड़ता है  

ये कुछ भयावह व्यवहारिक परिणाम है जो गलत सेकुलरिज्म के परिभाषा के वजह से जन्म लिया है और भारत को नष्ट कर रहा है

ऐसे अनेक विचार, सोच, स्टैट्मेंट, सरकारी योजना, अनुदान आदि आदि जो केवल मुसलमानों के लिए है

इसका मूल स्रोत है,  स्वयं को सेक्यलर सिद्ध करने के लिए हिन्दू नेताओं का अज्ञानता भरा लालच है

जो यह मान  कर चलते है कि मूसलमान भारत मे आजादी के बाद गरीब हो गया है और अत्याचार का शिकार एक माईनॉरटी कम्यूनिटी है

जबकि जमीन पर हालात इससे ठीक उलटे है और जिहाद के वजह से भारत में हिंदुओं कि जिंदगी सिकुड़ती जा रही है

दूसरा बिन्दु है भारत का मूसलमान, भारत के विकास यात्रा के स्वभाविक लाभ से बंचित है- यह भी एक बड़ा फ्रॉड है

1947 मे मिले आजादी के बाद चार शिक्षा मंत्री मूसलमान बने, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, हुमायूं कबीर, मोहम्मद करीम चांगला, फ़ख़रुद्दीन अली अहमद भारत के लगभग सभी संस्थानों मे उच्च स्तर तक मुसलमानों को जगह मिली

आज भारत के विकास और मजबूत विदेश नीति का सबसे बड़ा लाभ मुसलमान को मिल रहा है पूरे मिडल ईस्ट मे नौकरी ले कर , पाकिस्तान के मुसलमानों से ज्यादा इज्जत और पैसा भारतीय मुसलमान को मिलता है ये भारत के विकास यात्रा के वजह से है

जैसे जैसे भारत कि अर्थ व्यवस्था बढ़ रही है वैसे वैसे मुसलमानों के व्यवसाय का आय भी बढ़ रहा है

बिजनस कि दुनिया मे भी कई अज़ीम प्रेम जी है, पूरे मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर मुसलमानों का कब्जा है

जितने भी हिन्दू फिल्मकार है या तो उसकी गुलामी मे काम करते है या इंडस्ट्री से बाहर हो जाते है या मार दिए जाते है

स्पोर्ट्स में एक से बढ़ कर एक मुसलमान खिलड़ियों ने भारत का  प्रतिनिधित्व किया है

इससे पता चलता है कि भारत मे मुसलमान को न  केवल उसकि हिस्सेदारी मिल रही बल्कि, जरूरत से जायदा मिल रहा है और हिंदुओं के हिस्से को भी लूट रहा है

और यह हो रहा है सेक्यलरिज़म के गलत अवधारणा कि वजह से है

मुसलमान के मजहब और संस्कृति को पर्याप्त, तर्कसंगत, कानून संगत रूप से समाज में, सार्वजनिक जीवन और मीडिया मे जगह नहीं मिलता है

आप किसी भी एयरपोर्ट पर चले जाएं मुसलमानों के लिए नमाज़ पढ़ने कि अलग से जगह बनी रहती है

भारत मे और अब यूरोप में भी आपने देखा होगा रेलवे स्टेशन, ट्रेन कि ट्रैक पर, मैदान में , हाइवे पर, गली में, चौराहों पर, व्यस्त बाजारों के बीच रास्ते को बंद कर या उस जगह के काम काज को रोक कर मुसलमान नमाज़ पढ़ते है और ये पूरे भारत में चलता है

इससे ज्यादा और वीभत्स तरीके से सार्वजनिक जीवन मे आप और किस तरह से अपने मजहब का प्रदर्शन कर सकते है .

किसी भी मीडिया चैनल पर हर पैनल में मुस्लिम प्रवक्ता होता है जो टीवी पर बैठ कर हिंदुओं को गाली देता है

राम मंदिर को खुलेआम नष्ट करने कि बात करता है ।

मुसलमानों के हर त्योहार के लिए विषेश प्रबंध किये जाते है, अधिकतर मुसलमान अरबी स्टाइल के कपड़े पहनते, बुरखा का प्रयोग खुले आम होता है , चार शादियाँ, हलाला आदि सुचारु रूप से चलता रहे इसके लिए मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड है, वक्फ बोर्ड है लाखों कि संख्या में मस्जिद है मदरसा है

दिन मे पाँच बार मस्जिद पर लाउडस्पीकर गरजते रहते है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते है

मुस्लिम आतंकवादियों के लिए सुप्रीम कोर्ट रात को दरवाजा खोलती है ।

इन घटनाओं से यही पता चलता है कि मुसलमान आज भारत मे अपनी पहचान कि राजनीति और मजहब को न केवल शानदार तरीके जी रहा है बल्कि हिंदुओं को मजबूर कर रही है उसके इस तरीकों को झेलने के लिए

मुसलमानों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में  पब्लिक या प्राइवेट नौकरी नहीं दी जा रही है 

आम तौर पर भारत में नौकरी योग्यता के अनुसार मिलता है, मुसलमानों के लिए भी वही अवसर उपलब्ध है और ये दिखता भी है .

यदि में अपने ऑफिस कि बात करूं तो कह सकता हूं मेरे ऑफिस में अच्छी संख्या मे मुस्लिम काम करते हैं।

इसी तरह भारत में हर क्षेत्र में मुस्लिम काम करते हुए आपको मिल जाएंगे. लेकिन मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो सेल्फ इमप्लॉइड  है और किसी भी औसत नौकरी से अच्छा कमाता है ।

ये काम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता चला आ रहा है और नौकरी करने ऊपर ध्यान कम जाता है

यदि समग्रता में देखे तो भारतीय समाज का मुसलमान किसी इस्लामिक देश के मुसलमान से काफी बेहतर जीवन जीता है और इस अच्छी जिंदगी का आधार है भारतीय समाज का हिन्दू बहुल होना है उसकी समरूप दृष्टि होना है

जबकि ठीक इसके विपरीत  मुसलमानों कि सामाजिक दृष्टि और सोच इस्लाम और मुस्लिम समुदाय के खूँटे से बंधा है और हिन्दू उसके लिए केवल काफिर है ।

जिसे एक दिन समाप्त हो जाना है ।

हम देखते है कि ये बाते भी सिरे से एक झूठ है, जिसे भारत के हिन्दू नेता केवल सेकुलर का सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए चलाता रहता है  

सुरक्षा एजेन्सीज मे हिंदुओं कि बहुलता मुसलमानों के लिए बड़ा खतरा है

यह एक एसा फ्रॉड है जो कल्पना पर आधारित है, व्यवहार में भारतीय समाज मे बार बार यह देखा गया है कि असल मे मुस्लिम समुदाय हिंदुओं के लिए बड़ा खतरा है ।

इसका सबसे ताजा उदाहरण है बंगाल जहाँ हिंदुओं का खुलेआम रेप, हत्या, धार्मिक प्रताड़ना, लूट, घरों मे आग लगाना, और घरों से भगा देना ।

यह हिंसा का दौड़ अभी वर्तमान में चल रहा है ।

उसी बंगाल मे एक केस का जांच करने के लिए बिहार से गए पुलिस कर्मि कि हत्या, भारी संख्याा मे जुटे मुस्लिम भीड़ के द्वारा पीट पीट कर दि जाती है

अब यंहा यह ध्यान देने कि बात है कि सुरक्षा एजेनसी मे हिंदुओं कि बहुलता है फिर भी पुलिस कर्मि और हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है

इसी तरह दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, केरल, तमिलनाडु, बिहार, उत्तरप्रदेश झारखंड, महाराष्ट्र आदि देश का कोई एस स्थान नहीं है जहा हिंदुओं का दमन मुसलमानों द्वारा नहीं हो रहा है । और ये घटनाए रोज हो रही है

इन व्यावहारिक घटनाओं से साफ दिखता है कि सुरक्षा बालों में हिंदुओं कि संख्या कोई माइने नहीं रखता है

बल्कि ठीक इसके उलट यह देखा गया है कि जहाँ कहीं भी सुरक्षा बलों मे मुस्लिम हैं वो किसी घटना के वक्त अपने मुसलान होने को आधार बना कर फैसला लेते है यानि काफिरों के खिलाफ एक सचेत फैसला लेते हैं

श्री सीता राम गोयल जी आगे लिखते हैं कि हर एक हिन्दू राजनेता, लेखक, पत्रकार, कवि, कलाकार, निर्देशक, ऐक्टर, ऐक्ट्रिस राजनीतिक पार्टी को यदि, भारत मे प्रचिलत इस सेक्यलर शब्द के विशेष परिभाषा और सेक्युलर वाद के  टेस्ट को पास करना है, तो उन्हें, उसके कसौटी पर खरा उतर कर दिखाना होगा

उन्हें सार्वजनिक रूप ये 7 घोषणाए करनी होगी, और समाज व दुनिया के सामने इसका प्रदर्शन भी करना होगा

वो सात शर्तें हैं  –

  1. इस्लाम सामाजिक बराबरी और भाईचारा जैसे विचारों वाला मजहब है

गांधी से लेकर मोदी तक जितनी भी राजनैतिक संस्थाएं और राजनेता भारत मे हुए है, इने गिने को छोड़कर, सब ने इस भ्रामक और असत्य का प्राचार  प्रसार और पोषण किया है

जबकि जमीन पर जनता जानती है कि इस्लाम का भाईचारा से कोई लेनादेना नहीं है । 

ये केवल सेक्युलर दिखने का एक शर्त है जिसे हिन्दू नेता, हिंदुओं के खून से सींच कर इस शर्त को केवल राजसत्ता मे बने रहने के लिए पूरा करता है

  • प्रोफेट मोहम्मद के जन्मदिन को धूमधाम से मनाना ।

आपने देखा होगा भारत मे प्रोफ़ेस्ट मुहहमद के जन्म दिन पर अवकाश घोषित किया जाता है और हर हिन्दू नेता मुस्लिम नेताओं से ज्यादा बढ़ चढ़ कर जन्म दिन कि बधाइयों कि घोषना करते है ।

प्रोफेट मोहहमद के जन्म दिन पर यह व्याहवार हिन्दू नेताओं के दिल से निकलनेवाला भावना नहीं है यह सेक्यलर दिखने कि अनिवार्य शर्तों को पूरा कर मुस्लिम वोट लेने का अज्ञानता पूर्ण लालच है । और इस लालच कि कीमत चुकाता है हिन्दू आबादी अपनी जान देकर ।  

  • इफ्तार पार्टी मे शामिल होना होगा और इफ्तार पार्टी देना पड़ेगा,

सेकुलर दिखने के लिए हर हिन्दू नेताओं को इफ्तार पार्टी देना होगा और इफ्तार पार्टी मे शामिल होना होगा

ये बिल्कुल स्पष्ट है भारत का बच्चा बच्चा जनता है सरकारें जनता के खर्चे पर सरकारी इमारतों मे दफ्तरों में इफ्तार पार्टी का आयोजन करती है

तमाम हिन्दू नेता मुस्लिम टोपी पहन कर हरा चादर डाल कर मूसलमानों से ज्यादा मुसलमान दिखने कि कोशिश करता है और इसका मीडिया के जरिए खूब प्राचार प्रसार भी करता है ।

सेकुलर दिखने के लिए यह एक सबसे प्रचलित शर्त है और इसे छुटभैय्या नेता से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक करता है ।   

  • उर्स और उर्दू मुशायरा मे भी सम्मिलित होना पड़ेगा, उसकी वाहवाही करनी होगी

हमे अच्छी तरह याद है एक बार किसी चैनल पर कवि सम्मेलन सुन रहा था उसमें मुन्नबर राणा एक मुस्लिम शायर भी था जिसका माँ के ऊपर लिखा हुआ शेर बहुत मशहूर है । ये कार्यक्रम मध्य रात्री मे चल रहा था और टीवी पर लाइव था ।

तभी मंच संचालक ने ये घोषणा कि, मुख्यमंत्री मायावती जी का फोन आया है और वो मुन्नबर राणा के इस कविता को दुबारा सुनना चाहती है

और मुनब्बर राणा ने उस कविता का पाठ दुबारा मायावती के लिए किया ।

ये कितनी स्पष्ट रूप जमीन पर दिखती है कि कैसे हिन्दू नेता उर्दू मुशायरा में  शामिल होने के लिए लालायित रहते है और बड़े मंच कि तलाश मे रहते है

जहां से दुनिया के सामने यह प्रदर्शन किया जा सके कि देखो में हिन्दू होकर भी किसी हिन्दी कवि सम्मेलन मे नहीं जाता हूँ लेकिन एक उर्दू मुशायरा मे मध्य रात्री मे भी फोन के जरिये शामिल होता हूँ

भारत में हिन्दू नेताओं के द्वारा इस तरह से सेक्यलर दिखने कि आवश्यक शर्ते पूरी कि जाती है 

  • उर्दू को हर राज्य मे दूसरी भाषा बनाने के प्रयासों को समर्थन देना होगा, जहां जहां मुसलिम मिनोरियटी है

इसे समझने के लिये किसी भी राज्य सरकार के सूचना विभाग के विज्ञापन नीतियों को देख सकते है जिसमे यह निश्चित किया जाता है कि सरकारी विज्ञापन उर्दू अखबार मे देना जरूरी है

जबकि सबको पता है इसका कोई व्यवहारिक औचित्य नहीं है ।

इससे भी एक कदम आगे मनमोहन सिंह ने आई ए एस के इग्ज़ैम मे उर्दू भाषा को भी सम्मलित कर देश कि संप्रभुता के लिए आत्मघाती कदम उठाया और अब इसके परिणाम भी आने लगे है जो भयावह हैं

  • इस्लामिक आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर को प्रोत्साहन देना, उसके लिए विशेष प्यार दिखाना

देश के कोने कोने मे आप देख सकते है हर मुस्लिम आक्रान्ताओं के नाम से बड़े बड़े पार्क, मजार, कब्र, स्टेशन के नाम शहर के नाम उन मुसलामनो के नाम पर है जिसने उस शहर को जला कर राख कर दिया

जैसे नालंदा विश्व विद्यालय को जलाने वाला, खलजी के नाम से आज भी नालंदा के पास एक शहर और रेलवे स्टेशन का नाम है,  बख्तियारपुर

सेक्युलर साबित करने के लिए आपको उसका नाम याद रखना है जिसने आपके पूर्वजों,माता और बहनों के साथ रेप कर, उन्हें बाजारों मे सेक्स स्लैव बना कर बेचा उनका घर और गावं को जलाया और सम्पूर्ण कत्लेआम किया । 

  • मुगलिया भोजन और पहनावे कि सराहना करना उसे प्रोत्साहित करना, उसे अच्छा बताना होगा  

सेकयुलर दिखने के लिए मुगलई भोजन और कपड़े कि विशेष सराहना कारना होगा, जैसी कि मुगलों के आक्रमण से पहले भारत के लोग खान ही नहीं खाते थे ।

  • इस्राइल को गली देना और अरब से प्यार दिखाना होगा

और यह आखिरी शर्त है बिना सोचे समझे इजरेल को गाली देना फिलिसतीं के आतंकवादियों को गले लगाना अरब के ऊपर प्यार बरसाना

यदि आप इन शर्तों को पूरा करते है तो आप सेक्यलर हैं

हर एक हिन्दू राजनेता, लेखक, पत्रकार, कवि, कलाकार, निर्देशक, ऐक्टर, ऐक्ट्रिस राजनीतिक पार्टी को यदि, भारत मे प्रचिलत इस गलत सेक्यलरइजम के परिभाषा मे फिट होना है

तो उन सब को मुसलमानों के अनेक करनामों, कुकृत्यों, और रूढ़ियों, और अनुचित व्यवहरों, दूसरों के प्रति अन्यायपूर्ण विचारों और कार्यों को नजर अंदाज करना होगा,

जैसे कि आप उसे जानते ही नहीं, कुछ बिंदुओं को नीचे दिया गया है

1 सेकुलर होने के लिए आपको मुसलमान के लिए जनसंख्या नियंत्रण कि बात नहीं करनी है भले ही वो चूहे कि तरह बच्चे पैदा करे

2 आप अच्छे सेकुलर तभी माने जाएंगे जब मूसलमानों के अपने बच्चे को मदरसे मे पढ़ना और आधुनिक शिक्षा से दूर रखे के बात का समर्थन करेंगें

3. जब मुसलमान अपने औरतों को बुरखा मे पैक कर के रखे तब आपको एक अच्छे सेकुलर होने कि वजह से कुछ नहीं बोलना है

4. भारत के हर एक अच्छे सेक्यलर का कर्तव्य है कि मूसलमानों के द्वारा एक से ज्यादा शादी करने के बात का समर्थन करे और उसकी चौथि शादी के बारात मे शामिल हों  

5 जब मुसलमान छोटी और साधारण घटना को भी मजहबी रंग देकर दंगा शुरू करे तो सेकुलर को तुरंत मुसलमान के समर्थन मे खडा हो जाना चाहिए और हिंदुओं को दंगा के लिए दोषी बताना चाहिए ।

आप को याद होगा 2014 से पहले सोनिया और मनमोहन कि सरकार ने हिंदुओं के खिलाफ एक कानून बनाने के लिए एक बिल पेश किया था जिसेम यह कहा गया था दंगा कोई भी करे दोष हिंदुओं का ही होगा

  •  जब मुसलमान हर बात मे पाकिस्तान का समर्थन करे, खेल मे पाकिस्तान के जीत पर खुश हो और भारत के हार पर खुश हो  तब सेकुलर दिखने के लिए आपको चुप रहना है

7 जब भारत का मुसलमान पाकिस्तान से आने वाले आतंकियों को समर्थन दे, संरक्षण दे, और उसका बचाव करे तब भी सेकुलर दिखने के लिए आपको मुसलमान के साथ खड़ा रहना होगा  

  • इसी तरह हिंदुओं के पलायन, हिंदुओं कि प्रताड़ना, अरब व अन्य जगहों से आ रहे फंड, जो धर्मांतरण और हिंदुओं के प्रताडणा मे लगता हो उसके बारे मे चुप रहे

इस्लाम और भारत के मुसलमानों के इन तमाम सकारात्मक सेवा के बाद भी  भारत के राजनीतज्ञों को लगता है, अभी भी वो कुछ कम सेकुलर दिख रहा है, और इसलिए वो उन्हें सेकुलरिज्म के सर्टिफिकेट लेना पड़ता है  

और इस सर्टिफिकेट के मिलने का एक ही तरीका है कि वो बार बार दिल कि गहराइयों से हिंदुओं के प्रति गहरी घृणा के  भाव प्रकटीकरण करे

छोटी मोटी हिन्दू धर्म, संस्कृति, मान्यताओं के सार्वजनिक जीवन मे या मीडिया में प्रदर्शन पर तुरंत प्रतिक्रिया दें,

उसकी निंदा करें, अपनी आपत्ति दर्ज कराए , उसे हर तरह से कम्यूनल ठहराए ताकि कोई और उसे दोबारा न कर सके

कोई भी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के मंदिर या तीर्थ जाने, पूजा पाठ करने हिन्दू संस्कृति के पालन करने पर हमेशा तुरंत संविधान कि दुहाइ देते हुए आपत्ति दर्ज करना चाहिए, उसे भला बुरा कहना चाहिए

तमाम स्कूल कॉलेज उनीवर्सिटीस पर बीच बीच मे ये हिन्दू कॉममूनालिस्ट को छुपाने के लये भी कोसते रहना चाहिए

देश मे किसी भी तरह का दंगा हो उसकी पूरी जिम्मेदारी आर एस एस पर डालनी चाहिए

हिन्दुओ के प्रति नफरत, घृणा और अपराधी ठहराने के लिए आरोपों कि लिस्ट जितनी लंबी हो सके उसे उतनि  लंबी होनी चाहिए ।

लेकिन साथ मे मुसलमान या  इस्लाम के लिए प्यार करने कि वजह कि लिस्ट भी उतनी लंबी होनी चाहिए

इस तरह भारत मे सेक्युलरिज्म कअ मतलब है, भारत घृणा, हिन्दू घृणा

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